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अमित शाह फिर से चुने गए भाजपा अध्यक्ष (राउंडअप)

156 Days ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त सहयोगी अमित शाह रविवार को एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष चुने गए। मोदी के बाद पार्टी में सबसे मजबूत माने जाने वाले शाह का चुनाव अध्यक्ष पद के पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए हुआ है।

शाह (51) का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ। भाजपा मुख्यालय में हुए इस चुनाव में पार्टी के लगभग सभी बड़े नेता मौजूद थे। भाजपा नेता अविनाश राय खन्ना ने जैसे ही कहा 'अमित शाह को निर्विरोध चुन लिया गया है' सैकड़ों कार्यकर्ता खुशी से उछल पड़े। शंखनाद किया गया, उन पर पुष्पवर्षा की गई, उनके समर्थन में नारे लगाए गए।

फ्रांस के राष्ट्रपति की अगवानी के लिए चंडीगढ़ जाने की वजह से प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर मौजूद नहीं थे। लेकिन, अध्यक्ष चुने जाने पर उन्होंने शाह को बधाई दी।

मोदी ने कहा "भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के निर्वाचन पर बधाई। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में पार्टी नई ऊंचाइयां तय करेगी।"

मोदी ने कहा, "अमित भाई के जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम और संस्थागत अनुभव से पार्टी को लाभ होगा।"

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में शाह के दोबारा निर्वाचन पर उन्हें हार्दिक बधाई। वह पार्टी के सफलतम अध्यक्ष रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी विकास के पथ पर अग्रसर होगी और नई ऊंचाइयों और उपलब्धियों को हासिल करेगी।"

इस खास मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी मौजूद नहीं थे। माना जाता है कि ये नेता शाह के काम करने के तौर-तरीके को पसंद नहीं करते।

शाह ने इस मौके पर कोई भाषण नहीं दिया। मीडिया से भी उन्होंने कुछ नहीं कहा। वह सोमवार को पश्चिम बंगाल जा रहे हैं। उनकी हावड़ा में जनसभा होनी है। पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

कांग्रेस ने शाह की जीत पर भी तंज कसा। आडवाणी और जोशी की गैरमौजूदगी का जिक्र करने के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, "चुनाव पर उन्हें बधाई। आगे होने वाली हारों के लिए उन्हें बधाई।"

विज्ञान स्नातक अमित शाह व्यावसायी के पुत्र हैं। वह सर्वाधिक चर्चा में तब आए जब 2014 के आम चुनाव में इनके उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रभारी रहने के दौरान भाजपा ने राज्य की 80 में से 71 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की। भाजपा के सहयोगियों को भी दो सीट मिली थी।

मोदी और शाह की जोड़ी ने कांग्रेस के 10 साल के राज को खत्म करते हुए 2014 के आम चुनाव में भाजपा को शानदार जीत दिलाई।

शाह युवावस्था में गुजरात में आरएसएस के संपर्क में आए थे। 1982 में उनकी मुलाकात मोदी से हुई। तब से दोनों नेताओं के बीच घनिष्ठता बनी हुई है। उन्होंने 1983 में आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ली और 1986 में भाजपा में शामिल हुए। चार बार विधायक चुने जा चुके शाह गुजरात के गृह मंत्री रह चुके हैं।

शाह के लगातार ऊपर जाते ग्राफ को पहला बड़ा झटका तब लगा जब दिल्ली विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों भाजपा को ऐतिहासिक हार मिली।

एक और झटका शाह को बिहार में मिला जहां नीतीश कुमार-लालू यादव की जोड़ी ने भाजपा को करारी शिकस्त दी। भाजपा की हार के बाद उनके खिलाफ आवाजें उठीं। आडवाणी और जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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