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चीन में घरेलू हिंसा कानून ने पीड़ितों में जगाई आस

89 Days ago

झांग किन को उनके पति द्वारा अक्सर पीटा जाता है। उनकी शादी साल 2012 में हुई थी और तब से उनके साथ यह सिलसिला चल रहा है। हाल में मारपीट के दौरान उनके पति ने उनकी नाक तोड़ दी।

दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के शुआनवेई की निवासी झांग सोमवार दोपहर अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीधे राजधानी कुनमिंग के एक सपोर्ट सेंटर पहुंची। सपोर्ट सेंटर में रहकर वह अपनी लड़ाई की पहली शुरुआत करेंगी।

झांग ने कहा, "घर पर मैं घर का काम करती थी और अपने बच्चों की देखभाल करती थी, लेकिन फिर भी वह मुझे पीटता था।"

उन्होंने कहा, "मैं यहां सुरक्षित हूं, लेकिन अपने बच्चों को लेकर चिंतित हूं। मैं बस केवल उम्मीद कर सकती हूं कि हम सुरक्षित रह सकें।"

इस साल, एक मार्च को अस्तित्व में आए घरेलू हिंसा कानून ने झांग जैसे पीड़ितों में आशा की किरण जगाई है। पीड़ितों को बचाने के कई उपायों में उत्पीड़क को घर से बाहर निकलने का आदेश तक दिया जा सकता है।

बीजिंग में फैंगशान डिस्ट्रिक्ट पीपुल्स कोर्ट के पारिवारिक मामलों के न्यायाधिकरण के उप मुख्य न्यायाधीश झाओ लिंग ने कहा कि यह कानून लोगों को घरेलू हिंसा के बारे में अधिक जागरूक करेगा और एक निवारक की तरह काम करेगा।

बीजिंग में ही शिचेंग डिस्ट्रिक्ट पीपुल्स कोर्ट के झांग शुआंग ने यह स्वीकार किया कि घरेलू हिंसा के मामलों में सबूत जुटाना बेहद मुश्किल होता है और केवल 10 फीसदी मामले ही अदालत के माध्यम से सुलझते हैं।

बीजिंग झोंगमियान कानून कार्यालय की एक साझेदार हुआंग लिलिंग ने कहा कि गवाहों की कमी और अदालत में सबूत देने की अनिच्छा मामलों के आड़े आती है।

ऑल चाइना वूमेन्स फेडरेशन (एसीडब्ल्यूएफ) के मुताबिक, लगभग 25 फीसदी चीनी महिलाएं शादी के बाद प्रताड़ित होती हैं।

लेकिन कुछ ही मामले सामने आते हैं। एसीडब्ल्यूएफ को साल में लगभग 40 हजार मामले मिलते हैं, जबकि साल 2014 में 88 फीसदी लोगों ने अपनी पत्नियों को प्रताड़ित किया।

चीन में घरेलू हिंसा को बेहद गोपनीय व शर्मनाक मामला समझा जाता है और शायद ही इसे सामने लाने की कोशिश की जाती है।

लोगों की मानसिकता के बदले में समय लगेगा खासकर ग्रामीण लोगों के, क्योंकि अधिकांश ग्रामीणों का मानना है कि घरेलू मामलों को निजी ही रखना चाहिए।

चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ पॉलिटिकल साइंस एंड लॉ की वांग युआन ने कहा कि वे घरेलू हिंसा की तबतक पुलिस में रिपोर्ट नहीं करेंगी, जब तक कि किसी की जान को कोई खतरा न हो।

चाइना कंस्ट्रक्शन थर्ड इंजीनियरिंग ब्यूरो कंपनी में काम करनेवाले कोंग जिंगनान का कहना है, "कानून यथार्थ से अधिक प्रतीकात्मक है।" उन्होंने कानून के निवारक प्रभाव पर संदेह जताते हुए कहा कि यह शारीरिक हिंसा को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन मानसिक शोषण को बढ़ा देता है।

कोंग ने कहा, "हालांकि यह प्रगति है। पुलिस अधिकारी अब घरेलू हिंसा के मामलों में प्रतिक्रिया करने को प्रतिबद्ध हैं और इसे अब केवल पारिवारिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाता।"

इस साल तक घरेलू हिंसा को लेकर कोई विशेष कानून नहीं था और दो दशक पहले तक चीन में शारीरिक उत्पीड़न तलाक के लिए कोई आधार नहीं माना जाता था। घरेलू हिंसा पर पाबंदी के लिए साल 2001 में विवाह कानून में संशोधन किया गया।

झांग ने कहा, "कानून दर्शाता है कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है, लेकिन इसमें आगे और सुधार की जरूरत है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्पीड़न करनेवाले सभी लोगों को दंडित किया जाएगा, इसमें यह बात कोई नहीं आड़े नहीं आएगी कि शरीर पर चोट ज्यादा हैं या कम।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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