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जर्मनी में यौन उत्पीड़न की घटना के बाद शरणार्थी नीति पर घमासान

229 Days ago

जर्मनी पुलिस ने अब तक कुल 16 संदिग्धों की पहचान की है, जो जर्मनी के पश्चिम में स्थित शहर कोलोन में महिलाओं के यौन उत्पीड़न में शामिल थे।

नववर्ष की पूर्व संध्या पर करीब एक हजार लोगों के एक समूह ने कोलोन में महिलाओं को घेरकर न केवल उनके साथ बद्तमीजी की, बल्कि उनका यौन उत्पीड़न भी किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज किए गए एक चौैथाई मामलों में पीड़ितों ने यौन उत्पीड़न की बात कही है, जबकि दुष्कर्म के भी दो मामले सामने आए हैं।

पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि 31 दिसंबर को कुल 121 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

उन्होंने कहा कि अधिकांश संदिग्धों के नाम अज्ञात हैं, लेकिन तस्वीरों या वीडियो रिकॉर्डिग में उन्हें अच्छी तरह पहचाना जा सकता है।

चश्मदीदों व पीड़ितों के मुताबिक, हमलावर देखने में अरबी या उत्तर अफ्रीकी मूल के लग रहे थे।

जर्मनी के गृह मंत्री थॉमस दे मेजीरी ने हालांकि मंगलवार को कहा कि शरणार्थियों पर धारणा बनाकर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।

फिर भी, मर्केल के शरणार्थी फैसले का विरोध करने वाले लोगों को 'ओपन डोर पॉलिसी' पर हमला करने का मौका हाथ लग गया है।

देश की दक्षिणपंथी पार्टियों ने देश में शरणार्थियों की संख्या पर लगाम लगाने की मांग करते हुए मर्केल से सीमा पर कड़ा नियंत्रण के लिए कहा।

इस घटना से जर्मनी के लोगों की मानसिकता पर गहरा असर पड़ा है। टेलीविजन चैनल एआरडी द्वारा कराए गए एक पोल के मुताबिक, 30 फीसदी लोगों ने कहा कि कोलोन में हुई घटना के मद्देनजर वे बड़ी भीड़ से परहेज करेंगे।

मर्केल को उस वक्त बेहद प्रसिद्धि मिली थी, जब बीते साल उन्होंने 11 लाख शरणार्थियों को अपने देश में शरण देने की बात कही थी। ये शरणार्थी साल 2015 में जर्मनी पहुंचे थे।

चांसलर ने कहा कि घटना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में कई उपाय करेंगी। वे पुलिस बलों को बढ़ावा देंगी और देश की निर्वासन प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने का प्रयास करेंगी।

चांसलर ने हालांकि सांस्कृतिक सह अस्तित्व पर लगातार चर्चा का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "एक सही उत्तर देने का हमारा उत्तरदायित्व बनता है।"

नववर्ष की पूर्व संध्या पर महिलाओं के साथ हुए उत्पीड़न के खुलासे के बाद ऑस्ट्रिया व स्विट्जरलैंड जैसे यूरोप के अन्य भागों में भी ऐसे मामले सामने आने की खबरें आईं।

विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से यूरोप में शरणार्थियों की समस्या और बढ़ सकती है।

इंडो-एशियन नयूज सर्विस।

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