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पहले झुमके की याद फिर एक सपना, 5 साल में डबल होगी किसान की आमदनी

147 Days ago
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बरेलीः प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तरप्रदेश के बरेली में किसानों की एक रैली में एक ओर जहां बरेली की पहचान को 'झुमका बरेली में गिरा था' से जोड़ा, तो देश के सामने अपना एक सपना भी रखा कि आने वाले 5 साल में वह आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर यानी 2022 तक किसानों की आमदनी डबल करना चाहते हैं। उन्होंने किसानों की एक सभा में अपने शासनकाल के दौरान किसानों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताया।

'भगवान के बाद सरकार से ही उम्मीदें'
प्रधानमंत्री मोदी  ने कहा कि अधिकतर सरकारें चुनाव नजदीक आने पर दुनियां भर में किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों की घोषणा करती हैं, लेकिन उनकी एनडीए सरकार ऐसा नहीं करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'किसानों को भगवान के बाद सरकार से ही उम्मीदें होती हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनका ध्यान रखें।' उन्होंने कहा, मैं सभी राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वे अपनी कार्य योजनाएं तैयार करें और मुझे भरोसा है कि हमारा और आपका सपना पूरा होगा।'

खेती को तीन हिस्सों में बांटने की जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान अपने खेत का एक तिहाई हिस्सा उस पर बाड़ लगाकर बर्बाद कर देता है। अगर उस हिस्से पर फर्नीचर इत्यादि के लिये लकड़ी की खेती की जाए और एक तिहाई हिस्से में पशुपालन, मधुमक्खी पालन और अंडा उत्पादन के लिए कुक्कुट पालन किया जाए और उनसे होने वाली आमदनी को खेती की आय से जोड़ दिया जाए तो किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को जोड़ने की परिकल्पना का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार वाजपेयी के सपने को बल देकर आगे बढ़ रही है। इसी कोशिश के तहत ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ बनाई गई है और 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से यह योजना लागू करने का बीड़ा उठाया गया है।

खेती के साथ पशुपालन पर भी जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसान 'खेती के साथ-साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन पर जोर देना होगा। पहले खेती के लिए पंजाब और हरियाणा का नाम आता था, लेकिन बाद में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद खेती पर काम शुरू हुआ। किसानों के लिए योजनाएं बनाई गईं।' उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का नाम खेती के लिए काफी पीछे थे, लेकिन अब यह प्रदेश खेती के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। वहां के किसान कृषि में काफी आगे हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपना सपना साझा करते हुए कहा कि 2022 में जब भारत आजादी की 75वीं सालगिरह मना रहा होगा, उस समय तक किसानों की आय दोगुनी हो जानी चाहिए। उन्होंने इसके बाद किसानों से पूछा कि क्या उनका सपना पूरा होगा। मोदी ने कहा कि यह लक्ष्य कठिन नहीं है।

लक्षण कठिन, लेकिन असंभव नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि किसानों के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन इनके साथ आगे बढ़ना असंभव नहीं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'किसानों के सामने चुनौतियां हैं। परिवार बढ़ रहा है, जमीन के टुकड़े हो रहे हैं। परिवार के सदस्यों के हिस्से में बहुत ही कम जमीन आ रही है। ऐसे में किसान की पैदावार भी घट रही है।' उन्होंने कहा कि जमीन कम होती है तो पैदावार भी घटती है। ऐसे में किसान देश का पेट कैसे भरेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनौतियों को अवसर में तब्दील किया जा सकता है। अगर किसान और राज्य सरकारें साथ दें तो इन चुनौतियों से निपटा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने अपनी गलतियों की वजह से अपनी धरती को बरबाद कर दिया है। आवश्यकता से अधिक उर्वरक डाल दिया, बेतरतीब दवाइयां डालीं। यह धरती चुपचाप सहती रही। जब अन्न के भण्डार खाली होने लगे तो पता लगा कि हमने कितना अत्याचार किया। अब सरकार ने ‘सोइल हेल्थकार्ड योजना’ चलायी है। इसी तरह सरकार ने गुणवत्तापूर्ण बीज भी उपलब्ध कराने के लिये कठोरता बरती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जयन्ती के अवसर पर किसानों के लिये नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट ‘ई-प्लेटफार्म’ लागू करेंगे। इससे किसान अपने मोबाइल फोन पर देश की विभिन्न मण्डियों के भाव जानकर अपने उत्पाद बेच सकेंगे।

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