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पाक-To-पठानकोटः SP के बयानों में कितना दम, NIA ने की पूंछताछ, उठे सवाल..!

336 Days ago
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नई दिल्ली: पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले पर अब छानबीन की रफ्तार तोज होती जो रही है। मंगलवार को सबसे पहले आतंकियों का शिकार हुए एसपी सलविंदर सिंह अपने बयानों के कारण मीडिया में छाये रहे। शाम होते-होते उनके बयानों से उठे सवालों के जवाब जानने के लिए एनआईए की टीम ने भी पूंछताछ की, सूत्रों के मिली खबरों के अनुसार आतंकियों से पहले मुलाकात करने वाले एसपी के ड्राइवर और एख अन्य से भी कई सवाल पूंछें.

गौरतलब है कि मंगलवार को दिनभर में 16 मीडिया चैनलों को साक्षात्कार दिए, और उनमें कई अंतर देखने को मिले, जिसके बाद  कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हर जगह उनके वही बयान हैं। सलविंदर बेखौफ लग रहे हैं लेकिन उनके बयानों पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस में होने के बावजू उन्होंने आतंकियों से लोहा क्यों नहीं लिया। उनके आतंकियों के चंगुल से छूट जाने के बावजूद पंजाब पुलिस अलर्ट क्यों नहीं हुई। उन्होंने इसकी जानकारी किसे दी थी और जानदारी देने के बाद उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। आतंकी उनसे मिलने के बाद कैसे बेखौफ शहर में घूमते रहे और आतंकी आधी रात को एयरबेस में दखल हो गए।

बकौल एसपी सलविंदर सिंह आतंकियों ने उन्हें पहले बंधक बनाकर उनकी कार पर कब्जा किया। एसपी सलविंदर सिंह के साथ कार में उनके ड्राइवर और मित्र राजेश वर्मा भी थे। लेकिन सलविंदर सिंह ने जिस तरह से आतंकियों के चंगुल से छूटने के बाद बयान दिया है उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसपी सलविंदर ने बताया कि वह बिना वर्दी के सरकारी गाड़ी से जा रहे थे। वह रात को 11 बजे के आस-पास वापस लौट रहे थे। उसी वक्त सेना की वर्दी पहने कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। सलविंदर ने कहा कि उन लोगों ने उनसे गाड़ी की लाइट बंद करने को कहा और कार में जबरन घुसकर उन्हें पीछे की तरफ फेंक दिया। आतंकियों ने फिर एसपी सलविंदर  सिंह और उनके कुक को वहीं छोड़ दिया और एसपी सलविंदर  सिंह के दोस्त राजेश वर्मा को साथ लेकर आगे निकल गए।

जांचकर्ता अब भी इसी गुत्थी में उलझे हैं कि आखिर आतंकवादियों ने एसपी और उनके साथियों को छोड़ क्यों दिया? आतंकियों ने ऐसा तब किया जब वो पहले एक दूसरी गाड़ी को अगवा कर उसके ड्राइवर को मार चुके थे। एसपी का कहना है कि उस वक्त वह पुलिस की वर्दी में नहीं थे और उन्होंने आतंकियों को अपने आम इंसान होने की जानकारी ही दी थी।

सलविंदर ने कहा कि जिस वक्त आतंकियों ने उनका अपहरण किया, वह पठानकोट में एक ख्वाजा की मजार से गुरदासपुर लौट रहे थे। देर रात भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर एसपी का बिना किसी सुरक्षा के जाना अपने आप में संदेह पैदा करता है। एसपी सलविंदर  सिंह ने कहा कि वह धार्मिक काम से गए थे इसलिए हथियार भी लेकर नहीं गए थे। एसपी और उनके दोस्त के बयान में अंतर है? अहम बात ये है कि सलविंदर सिंह के साथ उनके मित्र राजेश वर्मा भी थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजेश ने अपने बयान में कहा कि जब आतंकियों ने उन्हें रोका तो उन्होंने शीशा नीचे करके बताया कि गाड़ी में एसपी सलविंदर सिंह साहब बैठे हैं। वहीं एसपी का कहना है कि आतंकियों को इस बारे में जानकारी नहीं थी कि मैं एसपी सलविंदर  सिंह हूं। दोनों बयानों में यह अंतर कई सवाल छोड़ता है।

सवाल ये भी हैं बॉर्डर के नजदीक इतने संवेदनशील क्षेत्र में एसपी सलविंदर सिंह अकेले क्यों घूम रहे थे? क्या उनके वाहन में किसी तरह का वायरलेस फोन आदि नहीं था? अगर गाड़ी सरकारी नहीं थी तो उसपर नीली बत्ती क्यों लगी थी? उन्हें बिना सुरक्षाकर्मियों के निकलने क्यों दिया गया? बिना सूचना के वो पठानकोट गए थे या उनकी रवानगी की सूचना थी? उन्होंने जो भी शिकायत की उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया या उन्होंने शिकायत ही नहीं की?

उन्होंने अपने बयान में आतंकियों की संख्या 4-5 बताई है। सही संख्या वो नहीं बता पाए। सच क्या है, सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच में जुटी हुई हैं। जिस तरह से इस हमले को अंजाम दिया गया उससे एक बात तो साफ है कि देश के एक बड़े रक्षा प्रतिष्ठान पर हमले की इस पूरी घटना को बिना किसी अंदर के शख्स की मदद के अंजाम देना संभव नहीं है। हथियारों की खेप का देश में आना, आतंकियों को चप्पे चप्पे की जानकारी होना और एयरफोर्स स्टेशन में कई घंटे सुरक्षाबलों को उलझाए रखना। यह सब बाते इसी पर मुहर लगाती हैं।

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