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पारंपरिक कॉयर उद्योग हो रहा आधुनिक

109 Days ago

देश का एक सबसे पुराना कॉयर उद्योग धीरे-धीरे आधुनिक मशीनों को अपना रहा है और इसे दिशा दे रहे लोगों के मुताबिक उद्योग के जीवित रहने के लिए इसके अलावा कोई और चारा नहीं है।

इस उद्योग से जुड़े कामगार भी आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं।

केरल के राजस्व और कॉयर मंत्री अदूर प्रकाश ने इसका कारण बताते हुए आईएएनएस से कहा, "यह एक पारंपरिक उद्योग है, लेकिन इसके पारंपरिक तरीकों के कारण नई पीढ़ी इसे अपना नहीं रही है। हमारे पास आधुनिकीकरण के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।"

केरल का कॉयर दुनिया में सर्वोत्कृष्ट माना जाता है। इसके उत्पादों की दुनियाभर में मांग है। करीब 3.5 लाख लोग इस उद्योग के संगठित क्षेत्र में तथा इससे भी अधिक लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं।

पारंपरिक रूप से नारियल की जटा से रेशा निकालना कठिन काम रहा है। जटा को छह महीने तक पानी में रखा जाता है। इतने लंबे समय तक पानी में रहने से यह काफी बुरा महकने लगता है। इसके बाद कामगार इससे रेशा निकालने का काम शुरू करते हैं।

इस काम के लिए कामगार को 70 पैसे रोज की दर से पगार मिला करता था।

ऐसी स्थिति में उद्योग का मशीनीकरण शुरू हुआ। यह प्रक्रिया कुछ साल पहले शुरू हुआ, लेकिन इसमें अब तेजी आई है।

सार्वजनिक कंपनी केरल राज्य कॉयर निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जीएन नैयर ने यहां छठे कॉयर केरल-2016 मेले में आईएएनएस से कहा, "पहले कामगारों ने मशीनों का विरोध किया। उन्हें डर था कि उनका रोजगार छिन जाएगा।"

उन्होंने कहा, "अब हालांकि इस उद्योग का काम आसान हो गया है। आधुनिकीकरण के कारण उत्पादन बढ़ा है। उत्पादन बढ़ेगा, तो बिक्री भी बढ़ेगी। आय बढ़ेगी। स्वाभाविक रूप से इससे पगार भी बढ़ेगा।"

नैयर ने जब जनवरी 2012 में निगम की कमान संभाली थी, तब इसकी आय 57 करोड़ रुपये थी। 2014-15 में बढ़कर यह 120 करोड़ रुपये हो गई है। इसी दौरान मशीनीकरण को बढ़ावा मिला।

उद्योग के लिए देश में ही मशीनों का निर्माण शुरू करने के लिए गत वर्ष अदूर में केरल स्टेट कॉयर मशीन मैन्युफैक्च रिंग कंपनी की भी स्थापना की गई है।

नैयर ने कहा, "बिना मशीनीकरण के केरल का कॉयर उद्योग मर जाएगा। उद्योग का मशीनीकरण जरूरी है। परंपरा अच्छी चीज है, लेकिन आधुनिकीकरण भी जरूरी है। दोनों जरूरी हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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