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बुंदेलखंड : सूखे बीच दूध की धारा बहाने पर जोर

126 Days ago

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड में सूखे के बीच दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान लगाए बैठे हैं। यही कारण है कि अखिलेश सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी जिलों में 'अन्ना प्रथा उन्मूलन योजना' के तहत अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं के प्रजनन, संवर्धन तथा संरक्षण के लिए चौकस व्यवस्था की है।

एक विशेष योजना के तहत पशुपालकों को नि:शुल्क चारा बीज किट उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग की योजना दुधारू पशुओं के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र में पूरे साल हरे चारा की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है, ताकि उच्च गुणवत्तायुक्त गायें व भैंस ज्यादा से ज्यादा दूध दे सकें।

दूध उत्पादकता बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार के रूप में हरे चारे की भी जरूरत है। कहा जा रहा है कि इस कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जाएंगे। इनमें गौशाला की खाली भूमि पर और पशुपालकों को हरे चारे के उत्पादन के लिए चारा बीज मिनी किट उपलब्ध कराना शामिल होगा।

इसी तरह चारा बीज नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाना आवश्यक होगा, जिनका क्रय राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों अथवा मान्यता प्राप्त पंजीकृत फर्मों से किया जाएगा। पशुपालकों को वितरित चारा बीज से क्षेत्र स्तर पर उत्पादित चारे का प्रदर्शन किया जाना भी आवश्यक होगा।

20 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य :

योजना के मुताबिक, उच्च आनुवंशिक गुणवत्तापरक सांड़ों की उपलब्धता तथा छुट्टा घूमने वाले साड़ों का बधियाकरण किया जाएगा, जिससे कम गुणवत्ता वाले पशुओं के प्रजनन पर रोक लग सके।

इतना ही नहीं, अन्ना प्रथा उन्मूलन योजना के तहत निम्न आनुवांशिक गुणवत्ता के पशु जिनका पालन-पोषण पशुपालकों के द्वार पर तथा गौशाला में बांधकर किया जा रहा है, इन पशुओं में नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की व्यवस्था नि:शुल्क कराई जाएगी।

बुंदेलखंड के विशेषकर हमीरपुर, महोबा, बांदा, जालौन, चित्रकूट एवं ललितपुर जिलों में ऐसे प्रजनन योग्य स्वदेशी गोवंशीय मादा पशुओं की कुल संख्या का अनुमानत 20 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान के लिए लक्ष्य रखा गया है।

कृत्रिम गर्भाधान का कार्य विभागीय केंद्रों, पैरा वेट्स एवं बायफ केंद्रों द्वारा निर्धारित शुल्क पर किया जाएगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से पशुपालकों के द्वार पर तथा स्थापित एवं सक्रिय गौशालाओं में केंद्रित किया जाएगा, जिसके सफल संचालन के लिए 80 रुपये प्रति कृत्रिम गर्भाधान का शुल्क रखा गया है।

इसमें गुणवत्तायुक्त वीर्य आदि सामग्री पर 40 रुपये प्रति कृत्रिम गर्भाधान व्यय किया जाएगा तथा अवशेष राशि पर 40 रुपये विभीगीय केंद्रों को लेवी शुल्क, पैरा वेट्स तथा बायफ केंद्रों को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रति कृत्रिम गर्भाधान दिया जाना प्रस्तावित है।

कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि गौशाला एवं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को ²ष्टिगत रखते हुए कृत्रिम गर्भाधान शुल्क माफ किया जाना अति आवश्यक है। इसके अलावा जो भी खर्च होगा, वह पशुपालन विभाग, बायफ एवं पैरावेट्स अपने पास उपलब्ध संसाधनों से करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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