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भारत-पाकिस्तान संबंध अतिसंवेदनशील : अखबार

116 Days ago

दैनिक अखबार 'डॉन' के संपादकीय में 'फिशरमैन प्लाइट' शीर्षक से मंगलवार को छपे लेख में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान संबंध बेहद अप्रत्याशित है और दोनों देशों की सरकारों के मिजाज के लिहाज से अतिसंवेदनशील भी है।

अखबार ने कहा, "उच्च स्तरीय राजनीति और दक्ष कूटनीति के युग में भी दूसरे देश के जल क्षेत्र में पकड़े गए मछुआरों की स्थिति खास तौर बहुत खराब होती है, जबकि बाबुओं की प्राथमिकता सूची यह मसला शायद ही दिखता है।"

अखबार के मुताबिक, सप्ताह के अंत में पाकिस्तानी जलक्षेत्र में कथित रूप से मछली पकड़ने के लिए समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने 20 भारतीय मछुआरे पकड़े । उनकी नौकाएं भी जब्त कर ली गईं। इससे पहले 20 फरवरी को भी 88 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मछुआरा सहकारी सोसायटी ने कहा कि 150 भारतीय मछुआरे अभी पाकिस्तानी जेलों में कैद हैं जबकि 50 पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलों में बंद हैं।

डॉन ने कहा, "अन्य मुद्दे जो भारत-पाकिस्तान संबंधों को खराब करते हैं, उनका हल ढूंढ़ना बहुत मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर मानवता और करुणा की भावना हो तो दूसरे देश के जल क्षेत्र में बहक कर गए मछुआरों के मुद्दे को रेखांकित किया जा सकता है।"

अखबार ने कहा, "समुद्री सीमा स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है और विदेशी जल क्षेत्र में बहक कर जाना बिल्कुल आसान है। अगर एक देश के मछुआरे गलती से दूसरे देश की जल सीमा चले जाते हैं तो उन्हें जेल में डालने की जगह सामान्य चेतावनी देकर वापस जाने देना चाहिए।"

इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए संपादकीय ने द्विपक्षीय प्रोटोकोल की मांग की है जो जब भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सक्रिय हो जाए, न कि जब ऐसी आवश्यकता होती है तो दोनों देशों के प्रशासन सद्भावना दिखाते हुए मछुआरों को रिहा करते हैं।

संपादकीय में यह भी कहा गया कि मछुआरे दीनहीन पृष्ठभूमि से आते हैं और प्राय: देखा जाता है कि जब उनकी जब्त नावों को छोड़ा जाता है तो वे समुद्र में जाने लायक नहीं रह जाती हैं।

अखबार ने कहा, "अब जब द्विपक्षीय मोर्चे पर कुछ प्रगति हुई है तो मछुआरों के मसले को भी बातचीत के एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए।"

संपादकीय में यह इच्छा जाहिर की गई कि मानवीय दुगर्ति को कम करने के लिए इस्लामाबाद और नई दिल्ली को जरूर काम करना चाहिए और एक दूसरे की समुद्री सीमा में घुसने पर मछुआरों की गलती समझना चाहिए न कि अपराध और इसी के अनुसार मामले से निपटना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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