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महबूबा मुफ्ती के अगले कदम को लेकर सस्पेंस

149 Days ago

वह कौन सी बात है जो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता महबूबा मुफ्ती को जम्मू एवं कश्मीर के नए मुख्यमंत्री की शपथ लेने से रोक रही है? बड़ी संख्या में लोग यही सवाल पूछ रहे हैं लेकिन ऐसा लग रहा है कि इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी का मजाक उड़ाने में लगी हुई है। पार्टी पूछ रही है कि आखिरी पीडीपी, भाजपा के साथ गठबंधन को फिर से शुरू क्यों नहीं कर रही है।

महबूबा के पिता एवं मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का 7 जनवरी को निधन हो गया था। उसके दो दिन बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया।

शुरू में महबूबा ने शोक की वजह से राजनैतिक बातें नहीं कीं।

लेकिन, अब तीन हफ्ते बाद लोग पूछ रहे हैं कि यह शोक ही था या कुछ और है जो मुफ्ती साहब की बेटी को राज्य में सत्ता संभालने से रोक रहा है।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को महबूबा से आग्रह किया, "खुदा के वास्ते, या तो नई सरकार बनाइए या फिर राज्य में नया चुनाव कराइए।"

उमर के व्यंग्य पर पीडीपी के वरिष्ठ नेता नईम अख्तर ने कहा, "मैं इसमें नहीं पड़ना चाहता कि अब्दुल्ला क्या कह रहे हैं। हमारे लिए जनकल्याण सत्ता से अधिक महत्व रखता है।"

महबूबा अपने पिता की मौत के बाद आधिकारिक रूप से 26 जनवरी को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह में नजर आईं।

पीडीपी ने 31 जनवरी को श्रीनगर और 3 फरवरी को जम्मू में 'फीडबैक मीटिंग' बुलाई है। इन बैठकों में पीडीपी-भाजपा सरकार के 10 महीने के काम का लेखा-जोखा होगा।

महबूबा के निकट के सूत्रों का कहना है कि वह अपने राजनैतिक विकल्पों पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही हैं।

एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "वह (महबूबा) इस बात से सहमत हैं कि दोनों सत्तारूढ़ पार्टियों द्वारा एक-दूसरे से किए गए वादों और लोगों से किए गए वादों के मामले में उनके पिता के 10 महीने के कार्यकाल में काफी कुछ बाकी रह गया है।"

जम्मू में भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार गठन पर अंतिम फैसला पीडीपी को करना है।

भाजपा के राज्य इकाई के अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने कहा, "पीडीपी की पहल का हम सकारात्मक जवाब देंगे।"

भाजपा के एक नेता ने आईएएनएस से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं महबूबा मुफ्ती के बीच बैठक हो सकती है।

लेकिन, इन्हीं सूत्रों ने इस बात को खारिज किया कि गठबंधन के एजेंडे पर कोई नई बात होगी।

मुफ्ती परिवार के लिए शोक के 40 दिनों की अवधि 15 फरवरी को पूरी हो रही है। सरकार गठन की आशा रखने वालों को उम्मीद है कि इस तारीख के बाद किसी भी दिन सरकार का गठन हो सकता है।

राज्यपाल एन. एन. वोहरा ने वरिष्ठ अफसरों से सालाना बजट की तैयारी में तेजी लाने को कहा है। इसे 31 मार्च से पहले पारित कराना अनिवार्य है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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