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राफेल सौदा समेत 14 और मुद्दों भारत-फ्रांस में बनी सहमति, हुआ समझौता

122 Days ago
| by RTI News

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नई दिल्ली : भारत-फ्रांस ने 36 फ्रांसिसी लड़ाकू विमान ‘राफेल’ की ब्रिकी के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये लेकिन कीमत को लेकर दोनों देशों में बरकरार मतभेद अरबों डॉलर के इस सौदे को निष्कर्ष तक पहुंचाने की राह में रोड़ा बन गए है। दोनों देशों के बीच हुए 14 समझौतों में राफेल सौदा का भी समझौता शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी और भारत की यात्रा पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बीच व्यापक एवं गहन विचार विमर्श के बाद ये समझौते हुए। इनमें आतंकवाद निरोधी, सुरक्षा एवं असैन्य परमाणु उर्जा में सहयोग को प्रमुखता दी गई है।

 भारत और फ्रांस ने 36 फ्रांसिसी लड़ाकू विमान ‘राफेल’ की ब्रिकी के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये लेकिन कीमत को लेकर मतभेद अरबों डॉलर के इस सौदे को निष्कर्ष तक पहुंचाने की राह में आ गये।

दोनों देशों के बीच हुए 14 समझौतों में राफेल का समझौता शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की यात्रा पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बीच व्यापक एवं गहन विचार विमर्श के बाद ये समझौते हुए । इनमें आतंकवाद निरोधी, सुरक्षा एवं असैन्य परमाणु उर्जा में सहयोग को प्रमुखता दी गई है।

ओलांद के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, ‘‘ वित्तीय आयामों को छोड़ते हुए भारत और फ्रांस ने 36 लड़ाकू राफेल विमानों की खरीद के अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। हमें उम्मीद है कि राफेल की खरीद से जुड़े वित्तीय आयामों को भी जितना जल्दी संभव होगा, सुलझा लिया जायेगा ।’’ आईजीए पर हस्ताक्षर को एक ‘निर्णायक’ कदम करार देते हुए फ्रां्रस के राष्ट्रपति ओलांद ने कहा कि कुछ वित्तीय मुद्दे हैं जिन्हें ‘‘कुछ दिनों के भीतर’’ सुलझा लिया जायेगा ।

मोदी की अप्रैल में फ्रांस यात्रा के दौरान इस सौदे की घोषणा के बाद से ही दोनों देश उड़ान भरने की स्थिति वाले 36 लड़ाकू राफेल विमानोंे की खरीद को लेकर आपस में बातचीत कर रहे थे ।

बहरहाल, दोनों देशों के बीच सौदे को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है क्योंकि दोनों पक्ष अब भी कीमत को लेकर बातचीत कर रहे हैं। यह सौदा करीब 59,000 करोड़ रूपये का होने का अनुमान है।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, ‘‘जिस पर हस्ताक्षर किया गया वो सहमति पत्र था। जब हम इसके वित्तीय पहलुओं को सुलझा लेंगे तो निश्चित तौर पर आईजीए को संपूर्ण रूप से निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।’’ जारी

'भारत-अमेरिका-फ्रांस की पहल'
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि पिछले एक साल से सारी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए चिंता जता रही है. लेकिन भारत, अमेरिका और फ्रांस ने  इसके लिए इनोवेशन की तरफ कदम बढ़ाया है. मोदी ने कहा, 'किसी भी देश के विकास के लिए एनर्जी बेहद महत्वपूर्ण है. इन तीनों राष्ट्रों की कोशिश है कि ऐसे इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाए जो टिकाऊ, सस्ता और सबकी पहुंच में हो.'

'पर्यावरण संरक्षण भारत की परंपरा'
पीएम मोदी ने अमेरिका, भारत और फ्रांस के इस गठजोड़ को दुनिया के हित में बताया. मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संस्कृति का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा, 'भारत वह देश है जिसने दुनिया को प्रकृति से प्यार करना सिखाया. हमारे पूर्वजों ने हमें प्रकृति से प्रेम की शिक्षा दी. हम पौधे में भगवान देखने वाले लोग हैं. यह हमारी परंपरा है.' मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) का मुख्यालय भारत में है लेकिन यह एक वैश्विक संगठन है जो सभी लोगों के हित में काम करेगी.

'वैश्विक संगठन है ISA'
भारत ने एक विचार रखा की क्यों न दुनिया में ऐसे देशो का संगठन खड़ा किया जाए जिन देशो में 300 दिनों से ज्यादा सूर्य का प्रकाश रहता है. क्यों न हम उसको एक ताकत के रूप में स्वीकार कर दुनिया की भलाई का रास्ता खोजे. क्यों न हम 122 देशों का एक संगठन बनाएं जो सूर्य शक्ति से युक्त हैं. 30 नवंबर को दुनिया के सभी देशों के मुखिया उस समारोह में मौजूद थे जहा आईएसए नामक संस्था का जन्म हुआ. इसका मुख्यालय गुड़गांव में है लेकिन यह एक वैश्विक संगठन है जैसे WHO, UN पूरे विश्व के हैं वैसे ही ISA भी दुनिया के हित के लिए काम कर रहा है. वो देश जो छोटे-छोटे आइलैंड्स पर बसे हैं जिन्हें यह भय है कि समुद्र का पानी बढ़ा तो वे समाप्त हो जाएंगे. मैं आइलैंड देशों के नेताओं से मिला हूं. यह एलायंस उन्हें जीवन दान देगा. मोदी ने सहयोग के लिए ओलांद का आभार भी जताया.

सोलर एलायंस दुनिया को भारत का गिफ्ट
इस मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि सोलर एलायंस जलवायु परिवर्तन से जूझ रही दुनिया को भारत का तोहफा है. उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसे देश की पहल है जहां रोज लाखों लोग योग के दौरान उगते हुए सूर्य का स्वागत करते हैं ताकि वह पूरी दुनिया को एनर्जी दे सके. उन्होंने कहा कि भारत की इस पहल से ग्लोबल वार्मिंग का दंश झेल रही दुनिया राहत महसूस करेगी.' ओलांद ने कहा कि भारत सभी विकासशील देशों की अगुवाई कर रहा है. भारत के निर्णय और उनके परिणामों का असर इन देशों पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'सोलर एलायंस अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है. यह पूरी दुनिया को भारत का तोहफा है. फ्रांस इस एलायंस में भारत के साथ जुड़ कर गर्व महसूस करता है.'


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