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सीरिया वार्ता से पहले रूस और तुर्की के बीच दूरियां बढ़ी

116 Days ago

तुर्की की विदेश नीति विशेषज्ञ के मुताबिक रूस ने यह कदम संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में अगले हफ्ते होने वाली सीरिया शांति वार्ता में अपनी स्थिति को मजबूत करने और अपना कद बढ़ाने के लिए उठाया है।

गाजी विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रो. मेहमत सेफेटिन ने बताया, "अंकारा द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद रूस ने तुर्की हवाई क्षेत्र का उल्लंघन यह बताने के लिए किया है कि सीरिया की तकदीर निर्धारित करने में दूसरों की तुलना में उसका प्रभाव अधिक होगा। यह संदेश नाटो सैन्य गठबंधन को भी भेज दी गई है, क्योंकि तुर्की नाटो का सदस्य है और उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नाटो के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन है।"

तुर्की ने बताया कि उसके हवाई क्षेत्र का यह कथित उल्लंघन शुक्रवार को रूस के सुखोई 34 जेट विमानों ने किया, जिसकी तत्काल तुर्की, अमेरिका व नाटो ने भर्त्सना की।

वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनाशेनकोव ने तुर्की के आरोपों को खारिज करते हुए इसे खालिस दुष्प्रचार की संज्ञा दी।

रियाद के दौरे पर गए तुर्की के प्रधानमंत्री अहमत दावुतोग्लु ने कहा कि इस उल्लंघन को कई सारे निगरानी स्टेशन पर रिकार्ड किया गया जिसमें तुर्की के साथ नाटो के स्टेशन भी शामिल हैं। दावुतोग्लु के मुताबिक सीरिया में रूस द्वारा की जा रही बेतहाशा बमबारी बातचीत में अपनी मनमानी चलाने के लिए की जा रही है, साथ ही वे सीरिया की सरकार के खिलाफ मजबूत स्थिति में पहुंचे विरोधियों को कमजोर करने के लिए भी है।

24 नवंबर 2015 को तुर्की ने एक रूसी जेट विमान को अंकारा के निकट सीरिया की सीमा के पास मार गिराया था और कहा था कि विमान ने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। इसके बाद रूस ने सीरिया के खिलाफ कई सारे राजनयिक, आर्थिक और सैन्य कदम उठाए।

यूरोपीय यूनियन में रहे तुर्की के पूर्व राजनयिक उलूक ओज्लुकेर का कहना है कि उन्हें लगता है कि रूस ने यह अनजाने में किया होगा। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि वर्तमान में चल रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर रूस ऐसा जानबूझकर कोई नया तनाव खड़ा करना चाहेगा।" उन्होंने कहा कि तुर्की और रूस के बीच कहासुनी के बढ़ने से किसी का कोई फायदा होने वाला नहीं है।

तुर्की की सत्ताधारी पार्टी का नजरिया हालांकि इससे अलग है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसप तैयप एर्दोगान ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके जेट दुबारा तुर्की हवाई क्षेत्र में देखे गए तो उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा।

तुर्की की सत्ताधारी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी के प्रवक्ता ओमेर सेलिक ने रूस द्वारा तुर्की के हवाई क्षेत्र के कथित उल्लंघन को 'उत्पीड़न' करार देते हुए इसे कूटनीति और शांति के लिए खतरा बताया।

वहीं, सीरिया को लेकर तुर्की और रूस की नीति परस्पर विरोधी है। तुर्की जहां सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता से हटाने के लिए विरोधी गुटों का सर्मथन करता है, वहीं, रूस असद को कूटनीतिक और फौजी मदद मुहैया कराकर उसके दमिश्क के साथ है। रूस सीरिया में लगातार असद विरोधी समूहों जिसमें आईएस (इस्लामिक स्टेट) भी शामिल है, पर बमबारी कर रहा है। जबकि तुर्की का कहना है कि रूस आईएस की आड़ में दूसरे समूहों पर बमबारी कर रहा है जिससे इस क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा हो गया है।

वहीं, इस हफ्ते रूस की बमबारी से बचने के लिए सीरिया में रह रहे करीब 1,600 तुर्की इस हफ्ते वहां से भागकर वापस तुर्की पहुंच गए।

इस बीच तुर्की के विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपल्स के उपाध्यक्ष ओजतुर्क येलमाज ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि तुर्की ने पिछले 15 सालों से रूस के साथ जो संबंध बनाए थे, उसे वर्तमान सरकार ने संकट के कुप्रबंधन के कारण और नवंबर में रूस का जेट विमान मार गिराकर दुश्मनी में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जेनेवा में होने वाली सीरिया शांति वार्ता में सीरिया में रह रहे तुर्की के नागरिकों को पक्ष में शामिल कराने में भी वर्तमान सरकार नाकाम रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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