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हिमाचल : सतपाल सत्ती तीसरी बार बने भाजपाध्यक्ष!

145 Days ago
| by Vijay News

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हिमाचल प्रदेश में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को फिर से भाजपा की कमान सौंपी गई है। उन्हें सर्वसहमति से तीसरी बार पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने तीन सांसदों और 17 विधायकों के साथ सत्ती के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र बरागटा ने भी 20 डेलीगेट के साथ सत्ती को फिर से अध्यक्ष की कमान देने पर सहमति जताई। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय पर्यवेक्षक गणेशी लाल ने सत्ती के अध्यक्ष बनने की घोषणा की। अब भाजपा वर्ष 2017 विधानसभा का चुनाव सत्ती की अध्यक्षता में लड़ेगी। भाजपा में सत्ती के अध्यक्ष बनने का यह सबसे लंबा कार्यकाल होगा। इससे पहले पार्टी में जो भी अध्यक्ष रहे उनका कार्यकाल 3 साल तक का रहा है। ऐसे में सती सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहेंगे। सत्ती को तीसरे बार अध्यक्ष बनाने के पीछे संगठन और पार्टी में बेहतर तालमेल होना बताया गया है। सत्ती की अध्यक्षता में भले ही भाजपा विधानसभा चुनाव हारी हो, लेकिन इसके डेढ़ साल बाद भाजपा ने एकजुटता दिखाकर सांसद की चारों सीटों पर कब्जा किया है। जो सत्ती के पक्ष में जाता है। इसके साथ ही प्रदेश भर में चलाए गए सदस्यता अभियान, अभ्यास वर्ग और मंडल स्तर पर सत्ती की अध्यक्षता में पार्टी को मजबूत करना भी उन्हें सरदारी सौंपे जाने की बात कही गई। डोडरा क्वार को छोड़कर सत्ती ने हिमाचल के हर कोने में भ्रमण कर पार्टी को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि पार्टी की ओर उन्हें जो जिम्मेबारी गई है वह इसे बखूबी निभाएंगे। पार्टी में बड़े नेता होकर भी उन्हें फिर से अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से भाजपा को आगे बढ़ाया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी भारी बहुमतों से विजयी होगी। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, सभी सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी व प्रदेश परिषद के सभी सदस्य उपस्थित थे। हिमाचल में भाजपा एकजुट है, पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है, महज विचारों में भिन्नता हो सकती है। चुनौतियां एक के लिए नहीं, पार्टी के हर नेताओं के लिए रहती हैं। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की कतार है। एकजुटता के कारण चुनौतियों का सामना किया जाता है। हिमाचल भाजपा में गुटबाजी के चलते भी पार्टी ने अध्यक्ष पद के लिए सतपाल सिंह सत्ती पर फिर से दांव खेला है। अध्यक्ष पद के दावेदारों में एक खेमे की पसंद दूसरे की नापसंद के चलते भाजपा ने तीसरी बार प्रदेश में पार्टी की बागडोर सत्ती को सौंप दी। करीब एक दशक तक एबीवीपी में पूर्णकालिक रहे सतपाल सिंह सत्ती को भी संगठन का पूरा साथ मिला। पिछले कार्यकाल में सबको साथ लेकर चलने का भी उन्हें इनाम मिला। लंबी जद्दोजहद के बाद प्रदेश में भाजपा ने तीनों बड़े नेताओं प्रेमकुमार धूमल, जेपी नड्डा और शांता कुमार ने सत्ती के नाम पर अपनी सहमति दे दी। हिमाचल भाजपा अध्यक्ष पद के लिए सांसद राम स्वरूप शर्मा, विधायक राजीव बिंदल, रणधीर शर्मा, जयराम ठाकुर, सुरेश भारद्वाज के नाम भी चल रहे थे। इस बार भाजपा जातीय समीकरणों के आधार पर अध्यक्ष बनाने की योजना पर काम कर रही थी। अगले वर्ष विधानसभा चुनाव के मद्देनजर धूमल, शांता और नड्डा गुट अपने-अपने लोगों के नाम आगे बढ़ा रहे थे। ऐसे में दावेदारों में कोई एक गुट को पसंद था, तो दूसरे को नहीं। किसी एक नाम पर सहमति न बनते देख पार्टी ने सतपाल सत्ती को ही फिर से यह जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया। सत्ती के नेतृत्व में भले ही भाजपा विधानसभा चुनाव हार गई थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सूबे में चारों सीटें जीती। सूत्रों की मानें तो सतपाल सिंह सत्ती धूमल की पहले भी पसंद रहे हैं। एबीवीपी संगठन में लंबे समय तक रहने के कारण जेपी नड्डा भी उनके पक्ष में थे। बीते कार्यकाल में सत्ती ने हर बड़े काम से पहले शांता को भरोसे में लिया था। लिहाजा, उन्होंने भी मौजूदा अध्यक्ष के नाम पर ही सहमति दे दी।

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