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आधार नहीं रहा निराधार, मिला कानूनी अधिकार..!

108 Days ago
| by RTI News

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नई दिल्लीः आधार विधेयक शुक्रवार को निचले सदन लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ पास पारित हो गया। इस विधेयक को संसद में धनसंबंधी बिल के रुप में संसद से पास किया गया. जिसके बाद अब देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान नंबर (आधार कार्ड) के आधार पर उन्हें सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लक्षित वितरण) विधेयक-2016 लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। 


दरअसल, अगर कोई विधेयक धनसंबंधी बिल के रूप में लोकसभा द्वारा पारित किया जाता है, तो संसद का उच्च सदन (राज्यसभा) उस पर केवल चर्चा कर सकती है, उसमें संशोधन नहीं कर सकती। इसके अलावा राज्यसभा को धनसंबंधी बिल पर चर्चा भी तुरंत करनी पड़ती है, क्योंकि यदि राज्यसभा में पेश किए जाने के 14 दिन के भीतर चर्चा नहीं होती है, तो उसे 'पारित मान' लिया जाता है।


विपक्ष का कहना है कि सरकार राज्यसभा को 'अनावश्यक' बनाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि वहां वह अल्पमत में है, और उनके लिए बिलों को पारित कराना कठिन है।


आधार बिल 2016 के अंतर्गत यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर (एकमात्र पहचान क्रमांक) प्रोग्राम अथवा 'आधार' को कानूनी मान्यता दी जाएगी, और फिर सब्सिडी तथा अन्य लाभ सीधे बांटने के लिए उसी का इस्तेमाल किया जाएगा।


इससे पहले आधार बिल पर लोकसभा में हुई बहस में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि आधार कार्ड के लिए दी जाने वाली सूचनाओं को पूरी तरह सुरक्षित किया गया है। इनका दुरुपयोग नहीं होगा। इस विधेयक में देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड देकर और उसके आधार पर उन्हें सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। आधार कार्ड उन सभी को दिया जाएगा, जो आधार आवेदन करने से पहले साल में 182 दिनों के लिए देश में रह चुके हैं।


विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘इसमें कोई छिपी हुई मंशा नहीं है और गोपनीयता बनाये रखने के ठोस प्रबंध किये गए हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य आम लोगों, गरीबों तक कल्याण योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और लीकेज को खत्म करना है।’ 

उन्होंने कहा कि इस विधेयक की संकल्पना पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की है, लेकिन तब भी गोपनीयता एवं अन्य विषय उठे। 2009 के बाद से सात वर्ष गुजर गए हैं। इन सभी विषयों पर गंभीरता से विचार किया गया है और विधेयक में चैप्टर-6 जोड़ा गया है जो गोपनीयता से संबंधित है जिसमें संबंधित प्राधिकार से गोपीयता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। कुछ डाटा व्यक्ति की सहमति से साझा की जा सकती है लेकिन बायोमेट्रिक डाटा व्यक्ति की सहमति से भी साझा नहीं की जा सकती है।


जेटली ने कहा कि प्राइवेट एजेंसी को भी सूचना लीक नहीं करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मकसद राज्यों को सशक्त बनाना है ताकि वे लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचा सके। इस विधेयक पर लगभग आमसहमति है। इसलिए इसे पारित किये जाने की तत्परता है। 


जेटली ने कहा कि पहले के मसौदे में यह स्पष्ट नहीं था कि हम विशिष्ट पहचान संख्या का क्या करेंगे, लेकिन इस विधेयक में इसे पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब एवं आम लोगों के कल्याण के लिए सब्सिडी प्रदान करती है। लेकिन अब से कुछ समय पहले तक मेरे जैसा व्यक्ति भी एलपीजी, पेट्रोल सब्सिडी ले सकता था। क्या हमारे जैसे लोगों के लिए सब्सिडी है? 


वित्त मंत्री ने कहा कि हमने यह पहल की है कि सब्सिडी का लाभ लक्षित लोगों को मिले और जो लोग इसके हकदार नहीं है, उन्हें सब्सिडी न मिले। विधेयक के धन विधेयक के रूप में पेश किये जाने के बारे में सवाल के बारे में जेटली ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 110 सी में कहा गया है कि जो भारत की संचित निधि से संबंधित हो, वह धन विधेयक होगा। इस बारे में आसन की व्यवस्था होती है।


ध्वनि मत विधेयक हुआ पारित 

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के वितरण) विधेयक-2016 लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया. इससे पहले इस पर बहस हुई, जिसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि आधार कार्ड के लिए दी जाने वाली सूचनाओं का दुरुपयोग नहीं होगा.


आधार होगी खास पहचान 

इस विधेयक में देश के नागरिकों को एक विशिष्ट पहचान संख्या या आधार कार्ड देकर और उसके आधार पर उन्हें सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता मिल जाएगी. आधार कार्ड उन सभी को दिया जाएगा, जो आधार आवेदन करने से पहले साल में 182 दिनों के लिए देश में रह चुके हैं.


इनमें होगा उपयोगी

>> सरकारी सहूलियतें और सब्सिडी पाने के लिए

>> पासपोर्ट, वोटर कार्ड, राशन कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेजों में

>> अकाउंट खोलने से लेकर बैंक की तमाम सुविधाओं के लिए

>> पेंशन जैसी सामाजिक योजनाओं में भी पड़ सकती है जरूरत 

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