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131 साल की पार्टी के दफ्तर में 39 साल के ‘मैनेजमेंट गुरू’ की क्लास..!

267 Days ago
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लखनऊ: भारत की आजादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली देश की सबसे पुरानी औऱ 131 बसंत देख चुकी कांग्रेस को अब उत्तरप्रदेश के चुनावों में वैतरणी पार करने के लिए ‘मैनेजमेंट गुरू’ प्रशांत किशोंर की जरूरत पड़ रही है। इसी क्रम में करीब 27 साल से यूपी की राजनीति में हाशिए पर पहुंच गई कांग्रेस उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए मैनेजमेंट गुरू प्रशांत किशोर की शरण में जा पहुंची है।

सन 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी भाजपा तथा 2015 में बिहार चुनाव में नीतीश कुमार के चुनाव प्रबन्धक रहे प्रशांत किशोर बुधवार यहां कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक करेगें। बैठक में कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री तथा प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री भी मौजूद रहेंगें। बैठक में सभी महासचिवों और उपाध्यक्षों को चुनावी रणनीति पर विचार विमर्श के लिए आमंत्रित किया गया है।
 
इस बीच सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए अगले महीने 100 उम्मीदवारों की घोषणा करने जा रही है। संभावित उन उम्मीदवारों के बारे में भी बैठक में चर्चा हो सकती है। लेकिन प्रशांत किशोर की वजह से प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर वरिष्ठ नेताओं में मतभेद की सूचनाए मिल रही हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा ने हाल ही में दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रशांत किशोर की हुई बैठक में भाग नहीं लिया था। सूत्रों का कहना है कि चुनावी रणनीति में नेताओं की अनदेखी कर प्रशांत किशोर को सारी जिम्मेदारी देने के कारण नाराजगी है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि प्रशांत किशोर को सारी जिम्मेदारी सौंपने पर संदेश जायेगा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी का राज्य में कोई नेतृत्व नहीं है। उनका कहना है कि पहली बार नेताओं की चुनावी बैठक कोई गैर राजनीतिक व्यक्ति लेगा।
 
इस पार्टी का प्रबंधन पं.जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे नेताओं के हाथ में रहा है। लेकिन दुर्भाग्य है कि अब चुनावी प्रबंधन एक ‘मैनेजर’ के हाथ दी जा रही है। उनका कहना था कि नीतीश कुमार के हाथ में सत्ता की वापसी लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाने को लेकर हुई है। न कि किसी मैनेंजर की वजह से नीतीश कुमार बिहार के दोबारा मुख्यमंत्री बने हैं। उधर प्रियंका गांधी वाड्रा को प्रचार समिति का प्रमुख और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की अटकलें लग रही हैं। राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष और मीडिया समिति के अध्यक्ष सत्यदेव त्रिपाठी ने बताया कि बैठक में 2017 के चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण विचार विमर्श किए जाएगें। किशोर की इस बाबत यहां पहली यात्रा होगी। उनके सामने कांग्रेस को इस सूबे में खडा करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगी।

20 सदस्यों की चुनाव कमेटी
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेसियों को सुनने के बाद प्रशांत किशोर ने बस इतना ही कहा कि यूपी में उनका सीधा मुकाबला बीजेपी से होने वाला है. उन्होंने चुनाव की तैयारी के लिए 20 सदस्यों की एक कमेटी बनाने की भी घोषणा की. मगर कमाल की बात ये रही कि प्रशांत किशोर को अपना इलेक्शन मैनेजर चुनने के बावजूद कांग्रेस पार्टी खुले तौर पर यह कबूलने को तैयार नहीं है कि चुनावी बागडोर किशोर के हाथ में है.

यूपी कांग्रेस प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा, 'यह संगठन का मसला है और हम इस पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा नहीं कर सकते. किसे लाना है और किसे नहीं, यह हमारा अंदरूनी मामला है.'

सपा, बीएसपी ने की कांग्रेस की आलोचना
दूसरी ओर, यूपी में 2017 चुनावों के लिए प्रशांत किशोर को बतौर रणनीतिकार इस्तेमाल करने के फैसले पर कांग्रेस की यूपी में जमकर आलोचना हो रही है. बीएसपी ने इसे जनता का तिरस्कार कर, रणनीतिकारों के बूते नय्या पार लगाने की कोशिश बताया है. वहीं, समाजवादी पार्टी इसे हताशा में उठाया हुआ कदम बता रही है. सपा नेता और यूपी सरकार में जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने तो यहां तक कह दिया है कि कांग्रेस के हवाई जहाज का इंजन फेल हो चुका है और ऐसे में 200 रणनीतिकार भी मिलकर उसके लिए यूपी चुनावों में नई जान नहीं फूंक सकते.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार (8 मार्च) को कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आजादी दिलाने का दावा करने वाली पार्टी को आज ‘‘पीआर’’ एजेंसी की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। अखिलेश ने विधानसभा में ‘सामान्य प्रशासन एवं गृह विभाग’ के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस पर कटाक्ष किया, ‘‘….दावा करते हैं कि आजादी इन्होंने ही दिलायी है। आजादी दिलाने का दावा करने वाली पार्टी को पीआर एजेंसी की जरूरत पड़ गयी।’’

जाहिर है उनका इशारा राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ओर था, जिनकी हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात हुई थी और अब दस मार्च को वह प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात करने जा रहे हैं। समझा जाता है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में नैया पार लगाने की जिम्मेदारी किशोर को सौंप दी गयी है।

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