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JNU विवादः पुलिस देखती रही और वकीलों से पिटते रहे पत्रकार!

165 Days ago
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नई दिल्ली : जवाहर लाल यूनीवर्सिटी (जेएनयू) मामले की सुनवाई से पहले राजधानी दिल्ली में सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट के परिसर में वकील हिंसक हो गए, और गुस्साए वकीलों के एक समूह ने मौके पर खड़े पत्रकारों, छात्रों, और अध्यापकों को जमकर पीटा। तो दूसरी ओर सोमवार को कोर्ट ने जेएनयू परिसर के अंदर राष्ट्रविरोधी कार्यक्रम के संबंध में देशद्रोह और साजिश के मामले में गिरफ्तार कन्हैया कुमार की पुलिस हिरासत 2 दिन के लिए बढ़ा दी। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि कन्हैया को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लवलीन के सामने पेश किया गया जहां पुलिस ने उससे हिरासत में पूछताछ का अनुरोध किया।

पुलिस ने अदालत को बताया कि कथित रूप से फरार सदस्यों सहित आरोपियों के आतंकी संगठनों से कथित संबंधों का पता करने के लिए कन्हैया को हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कन्हैया की पुलिस हिरासत दो दिन के लिए 17 फरवरी तक बढ़ा दी।

कोर्ट में कन्‍हैया मामले की सुनवाई से पहले मचे हंगामे के बाद कन्‍हैया को संसद मार्ग थाने ले जाया गया और जज ने खुद थाने पहुंचकर अदालत लगाई। वहीं कन्‍हैया की पेशी हुई और उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया कुमार की पेशी के दौरान काफ़ी हंगामा हुआ। वहां पहुंचे छात्रों और पत्रकारों के साथ भी हाथापाई देखने को मिली। कई वकील नारे लगाते और हंगामा करते नज़र आए।

बाद में जब मीडिया ने शर्मा से इस बारे में पूछा तो उन्होंने दावा किया कि जिस समय वहां ‘पाकिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जा रहे थे उस समय उनके साथ धक्का मुक्की की गई। जब उनसे कहा गया कि उनके किसी को पीटने की वीडियो फुटेज है तो शर्मा ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि आप किस वीडियो की बात कर रहे हैं।’ उसी सांस में उन्होंने यह भी कहा कि,‘ऐसे नारे लगाने वालों को पीटा जाना या मार दिया जाना गलत नहीं है।’ पत्रकारों द्वारा तुगलक मार्ग थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार अदालत परिसर में कम से कम नौ पत्रकारों पर हमला किया गया जिनमें से दो पत्रकारों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया।

जेएनयू के अध्यापकों ने कहा कि उनके करीब दस साथियों को पीटा गया। एक अध्यापक रोहित आजाद ने बताया कि वे सुनवाई देखने के लिए वहां गए थे लेकिन वकीलों के एक समूह ने उनपर यह कहकर चिल्लाना शुरू किया कि अध्यापक भी राष्ट्रविरोधी हैं।

जेएनयू के स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज की संकाय सदस्य निवेदिता मेनन ने कहा कि अध्यापकों पर हमला इस बात का स्पष्ट सबूत है कि सरकार देश को किस तरह चला रही है।

हमलावर चिल्ला रहे थे, ‘तुम (जेएनयू) राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी पैदा करते हैं। तुम्हें देश से बाहर चले जाना चाहिए। भारत अमर रहे, जेएनयू को बंद करो।’ यह कहते हुए हमलावरों ने छाता्रें और अध्यापकों को अदालत से बाहर खदेड़ दिया। एआईएसएफ के अध्यक्ष वलीउल्लाह कादरी ने संवाददाताओं को बताया, ‘इससे पहले कि सुनवाई शुरू होती वकीलों का चोगा पहने कुछ लोगों ने हमें अपशब्द कहना शुरू कर दिया। उसके बाद अचानक उनमें से कुछ ने बिना किसी उकसावे के हमें बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने हमें और छात्राओं को भी धकेला और पीटा।’

छात्रों और अध्यापकों ने यह कहकर अदालत से बाहर जाने से इंकार कर दिया कि उन्हें सुनवाई में शामिल होने का अधिकार है क्योंकि यह खुली अदालत में हो रही है।

समूह ने मीडियाकर्मियों के पहचान पत्र भी देखने को मांगे और उनसे भी अदालत परिसर से बाहर चले जाने को कहा। मीडिकर्मियों ने इसपर आपत्ति की और बाहर जाने से इंकार कर दिया तो उन्होंने उनपर भी हमला किया और उनपर जेएनयू का समर्थक होने और गलत रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया। छात्रों ने बताया कि अदालत परिसर में काफी संख्या में पुलिस बल तैनात था लेकिन उन्होंने इस समूह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

पुलिस बाद में सभी छात्रों, अध्यापकों और मीडियाकर्मियों को अदालत परिसर से बाहर ले गई। बाद में, गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि पटियाला हाउस अदालत परिसर में मीडियाकर्मियों पर हमला करने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘कानून अपना काम करेगा। जिन लोगों ने भी कानून अपने हाथ में लिया है उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मैं दिल्ली के पुलिस आयुक्त से बात करूंगा।’ उधर, पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी ने अदालत परिसर में हुई घटना को झड़प बताया और कहा कि कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मियों से धक्का मुक्की की गई। पुलिस शिकायतों का संज्ञान लेगी और उचित कार्रवाई करेगी। बस्सी ने कहा, ‘दोनों पक्षों की ओर से कुछ अतिरेक हुआ है।’

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