राहुल के नेतृत्व वाले विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को श्रीनगर से वापस लौटाया गया

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श्रीनगर| कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जम्मू एवं कश्मीर के लिए रवाना हुआ, जिसे श्रीनगर हवाईअड्डे पर रोक लिया गया और वापस दिल्ली भेज दिया गया। दिल्ली से 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल एयर विस्तारा की फ्लाइट से सुबह 11.50 बजे जम्मू एवं कश्मीर के लिए निकला।

सूत्रों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल को हवाईअड्डे से बाहर नहीं निकलने दिया गया।

यह प्रतिनिधिमंडल जमीनी हलातों को जानने के लिए घाटी का दौरा करना चाहता था।

घाटी में पांच अगस्त से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने और जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद से सुरक्षा कारणों से घाटी में लॉकडाउन है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और के.सी. वेणुगोपाल, लोकक्रांति जनता दल (लोजद) प्रमुख शरद यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी, द्रमुक के त्रिचि शिवा, राकांपा के नेता मजीद मेमन, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा और जनता दल(सेकुलर) के डी.कुपेंद्रा रेड्डी विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।

जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को विपक्ष के नेताओं को सलाह दी थी कि वे यहां दौरे पर न आएं और राज्य में किए जा रहे शांति प्रयासों को बिगाड़ने का प्रयत्न न करें।

श्रीनगर जाने से पहले भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि वह घाटी का दौरा कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के मकसद से नहीं कर रहे हैं। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह जिम्मेदार पार्टी के नेता हैं और वह वहां किसी प्रकार का कानून तोड़ने नहीं जा रहे हैं।

आजाद ने कहा, "सरकार कहती है कि जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति सामान्य है, लेकिन वह नेताओं को जाने की इजाजत नहीं देती है? ऐसा विरोधाभास कहीं नहीं देखा। यदि हालात सामान्य हैं, तो हमें वहां जाने से क्यों रोका जा रहा है?"

इससे पहले राहुल गांधी और जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बीच ट्विटर वार हो गया था। राज्यपाल ने कहा था कि राहुल फर्जी खबरों पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और स्थिति का राजनीतिकरण करने का प्रयास कर रहे हैं।

राज्यपाल ने 12 अगस्त को राहुल गांधी को कहा था कि वह उनके लिए एक विमान भेजेंगे, ताकि वह खुद अपनी आंखों से देखें की जमीनी हकीकत क्या है। इसके जवाब में राहुल ने कहा था कि उन्हें विमान नहीं चाहिए, बस यात्रा करने और लोगों से मिलने की अनुमति चाहिए।

 

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